पत्रिका में रचनाओं की सचित्र प्रस्तुति उसे आकर्षक और पठनीय बना देती है। सामग्री का चयन सूझ-बूझ के साथ किया गया है। डा0 रमानाथ त्रिपाठी ने रवीन्द्र नाथ ठाकुर की कविता की व्याख्या की है उसमें एक छोटी बच्ची का चित्र उभर कर आता है वह मर्मस्पर्शी है। श्री भरत पटेल का लेख ज्ञानवर्धक और रोचक है।
श्रीराम तिवारी
ग्वालियर (म0प्र0)
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